नान घोटाला | नान के पैसे से BJP ने लड़ा चुनाव!, रकम CM हाउस तक पहुंची!; मुख्य आरोपी शिवशंकर भट्ट ने कोर्ट में दिया शपथ पत्र, लगाये लगाए गंभीर आरोप

रायपुर:

नान घोटाले में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आरोपी शिवशंकर भट्ट ने शपथ पत्र देकर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, पूर्व खाद्य मंत्री समेत कई अधिकारियों पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। भट्ट ने पूर्व सीएम का नाम लेते हुए कहा कि तीन हजार करोड़ के इस घोटाले में सबसे बड़े षडयंत्रकारी पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह थे।

नान घोटाला प्रकरण के प्रमुख अभियुक्त और इस प्रकरण में सर्वाधिक समय तक जेल में रहने वाले शिवशंकर भट्ट का शपथ पत्र वायरल हो रहा है। 12 सितंबर को बिलासपुर में सुनीता ठाकुर नोटरी द्वारा सत्यापित यह शपथ पत्र नान घोटाले को लेकर नए दावे करता है।

इस शपथ पत्र में शिव शंकर भट्ट ने यह लिखा है कि, 2014 में नान के पास 9 लाख मिट्रिक टन धान था बावजूद इसके तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने विभागीय अधिकारियों पर दबाव देकर दस लाख मिट्रिक टन चावल का अतिरिक्त उपार्जन का आदेश दिया। रमन सिंह ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के हैसियत से 236 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति गारंटी जारी कर दी, जो कि विधि विरुद्ध है ।

शपथ पत्र में दावा है कि रमन सिंह ने कहा कि इसमें आपत्ति करने की जरुरत नही है। हमें और पार्टी को लंबी चौड़ी रक़म मिलनी हैं और यदि आप लोग चाहेंगे तो आप लोगों को भी लंबी चौड़ी रक़म मिलेगी।यही बात तत्कालीन खाद्य मंत्री पुन्नील्ल मोहले के हवाले से भी लिखी गई है।

शपथ पत्र यह दावा भी करता है कि,21 लाख फर्जी राशन कार्ड बनाए गए। और विधानसभा में घोषणा के बावजूद कार्ड जारी रखे गए, इससे तीन हजार करोड़ सालाना की चपत लगी। शपथ में लिखा गया है कि, दस हजार करोड़ की सब्सिडी जारी कर दी गई जिसका ऑडिट ही नही हुआ।

शपथ पत्र में लिखा गया है कि,पुन्नीलाल मोहले को लालाराम भोजवानी ने भेजा और तब पाँच करोड़ रुपए चंदा दिया गया, उस समय सच्चिदानंद उपासने और धरमलाल कौशिक वहाँ मौजुद थे। अक्टूबर 2013 में पुन्नुलाल मोहले को एक करोड़ दिए गए।

यह शपथ पत्र तत्कालीन सीएम की पत्नी वीणा सिंह का जिक्र करता है जिसमें यह लिखा गया है कि,कौशलेंद्र सिंह के ज़रिए तीन करोड़ दिए गए।

इसके साथ साथ इसमें यह दावा भी है कि, कौशलेंद्र के ज़रिए ही पाँच लाख भी बीना सिंह को दिए गए एवं विक्रम सिसोदिया को भी हाउस में समय समय पर रकम पहुचाई गई यही.

शपथ पत्र के अंतिम कॉलम में शिवशंकर भट्ट ने उनके पास से दिखाई गई जप्ती और कार्यवाही को गलत और फर्जी बताया है।