बड़े बुजुर्गों के सामने सीट में बैठने झिझकते रहे अध्यक्ष – पदभार ग्रहण के बाद अपने पिता से गले मिलकर भावुक हुए गफ्फू

फारुक मेमन

गरियाबंद :  नगरपालिका का आज शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ. इस अवसर पर नगर पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गफ्फू भाई मेमन उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोनटके के साथ समस्त पार्षदों ने शपथ गहण कर अपना पदभार ग्रहण किया साथ ही समस्त पाषदो ने एक बैठक गरियाबंद की विकास की समुचित रुपरेखा तैयार की.

इस अवसर पर नगर के अनेक वरिष्ठ जन ,गणमान्य नागरिक तथा सभी राजनीतिक दल के पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे. इस अवसर पर नवनिर्वाचित अध्यक्ष गप्पू भाई मेमन ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यहां उपस्थित सभी लोगों का मैं किसी का भाई हूं तो किसी का का बेटा हूं तो किसी का छोटा भाई हूं तो कुछ मेरे अपने छोटे भी हैं. इस चुनाव में सभी लोगों ने मिलकर मुझे जो सहयोग दिया है जिसके बदौलत आज मैं यहां तक पहुंचा हूं. यह आप लोगों की ही आशीर्वाद का परिणाम है.

नगर पालिका गरियाबंद के विजय  पार्षदों के लंबे इंतजार के बाद उन्होंने आज  पदभार ग्रहण किया. इस अवसर पर अनेक अविस्मरणीय घटना हुई जिसे हर कोई सजोकर रखना चाहेगा. आज नवनिर्वाचित पालिका अध्यक्ष गफ्फू मेमन के पदभार ग्रहण करने के अवसर पर उनके पिता श्री अलारख भाई विशेष रुप से उपस्थित थे.  जब उनकी नजर अपने पिता पर पड़ी तो उनके स्वागत करने अपने आप निर्धारित स्थान से उठकर भीड़ के बीच पहुंचे और अपने पिता का हार पहना कर सम्मान किया. इस अवसर पर उन्होंने अपने उद्बोधन कहा कि उनके पिता ने उन्हें खूब प्यार और अपना पन  दिया है. और उनके पिता एक दोस्त की तरह  हमेशा बर्ताव करते रहे हैं. उनका यह अपनापन मैं कभी भूल नहीं सकता. आज अगर यहां पहुंचा हूं तो उन्हीं के बदौलत है.

आज नवनिर्वाचित पार्षद नगर पालिका के गेट पर पहुंचे तो नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी उनके स्वागत में फूल माला और बुके लेकर इंतजार करते रहे और काफी देर तक यह सिलसिला चलता रहा. वहीं भीड़ की स्थिति यह थी कि आए हुए अध्यक्ष उपाध्यक्ष व पार्षद तो पीछे रह गए भीड़ उनके आगे इतनी अधिक थी कि उन्हें मंच तक जाने में भी दिक्कतें हो रही थी. जब अपने निर्धारित स्थान पर अध्यक्ष गाफ्फू मेमन पहुंचे तो उन्हें इतने सारे बुजुर्ग और उनके विभिन्न बड़े लोगों को देखकर वे झिझक गए क्योंकि बड़े बुजुर्गों का जिन्हें अब तक वे सम्मान देते रहे हैं कभी कुर्सी पर बैठे नहीं उनके आगे इस तरह कुर्सी पर बैठना में उन्हें झिझक महसूस हो रही थी. अंततः बड़े बुजुर्गों ने उन्हें कुर्सी पर बैठने को कहा तब भी बैठे.