शवो के दोस्त – इंसानियत की मिसाल शरीफ चाचा को पद्मश्री; किया 25 हजार लावारिस शवों का अंतिम संस्कार

नई दिल्ली: भारत सरकार ने साल 2020 के लिए पद्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाले नामों की घोषणा कर दी है. इस वर्ष 7 लोगों को पद्म विभूषण, 16 को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा. इस लिस्ट में शामिल कुछ नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. इनमें से एक नाम मोहम्मद शरीफ का भी है. आइए जानते हैं आखिरी कौन हैं मोहम्मद शरीर जिन्हें केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित करने का फैसला किया है.

अब तक करीब 25000 शवों का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ किया

मोहम्मद शरीफ अयोध्या में खिड़की अली बेग मोहल्ले के रहने वाले हैं. शरीफ ने करीब 25 सालों से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है. आस-पास के लोग उन्हें शरीफ चाचा कहकर बुलाता हैं. फैजाबाद और उसके नजदीकी इलाकों में उन्होंने अब तक करीब 25000 शवों का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ किया है. शरीफ चाचा पेशे से एक साइकिल मैकेनिक हैं.

धर्म के आधार पर कभी शवों के संस्कार में भेदभाव नहीं किया

मोहम्मद शरीफ का कहना है कि उन्होंने धर्म के आधार पर कभी शवों के संस्कार में भेदभाव नहीं किया है. मृतक व्यक्ति के धर्म को ध्यान में रखते हुए ही उसका अंतिम संस्कार किया जाता है. अगर मृतक मुस्लिम है तो उसे दफनाया जाता है और अगर वह हिंदू है तो उसे मुखाग्नि दी जाती है. शरीफ चाचा की लावारिस शवों की रखवाली और उनके अंतिम संस्कार का जिम्मा उठाने के पीछे की कहानी भी बड़ी दर्दनाक है. सूत्रों के मुताबिक शरीफ के एक बेटे की हत्या कर उसके शव को कहीं फेंक दिया गया था. बहुत तलाश करने के बाद भी शव नहीं मिल सका. तभी से शरीफ ने लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने का जिम्मा उठाया.