संसद में पोल्युसन पर हुई बहस; ज्यादातर नेता रहे नदारद- नहीं निकला कोई सोल्यूसन

नई दिल्ली:

लोकसभा के अंदर से जो तस्वीरें देखने को मिलीं वो बहुत ज्यादा निराश करती हैं. लोकसभा के अंदर की खाली कुर्सियों को देखकर ऐसा लगता है कि अभी प्रदूषण का जहरीला धुआं यूं ही सोखना होगा और बीमार होना होगा. क्योंकि आज की बहस से तो ऐसा लगता है कि प्रदूषण अभी खत्म नहीं होने वाला. जिन भी सांसदों ने आज बहस की, उनके शब्दों में चिंता तो दिखी लेकिन उनके हावभाव में चिंता नामात्र की भी नहीं थी. पॉल्यूशन पर बात तो हुई लेकिन सियासत हुई. सॉल्यूशन की बात नहीं हुई. सरकार की तरफ से पर्यावरण मंत्री के अलावा एक दो मंत्री और थे. बाकी कोई मंत्रीगण भी बहस में मौजूद नहीं था.

प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर आज लोकसभा में बहस हुई. करीब 3 घंटे तक चली बहस में ज्यादातर सांसद नदारद रहे. बहस के शुरुआत में दिल्ली के सात में से सिर्फ तीन सांसद ही लोकसभा में थे. बीजेपी सांसद मनोज तिवारी एक घंटे की देरी से पहुंचे.

उम्मीद थी कि देश के 135 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले 543 सांसद अगर वायु प्रदूषण पर गंभीर हैं तो चर्चा भी गंभीर होगी और फिर कोई हल भी निकलेगा. विपक्ष तो छोड़िये सत्ता पक्ष के लोग भी मौजूद नहीं थे. आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस दिल्ली में प्रदूषण को लेकर सबसे ज्यादा त्राहिमाम मचा हुआ है. इस बहस की शुरुआत में उसके भी सिर्फ तीन सांसद ही मौजूद थे. बहस शुरू होने के करीब एक घंटे बाद बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी लोकसभा पहुंचे. इससे पहले आज सुबह से ही साइकिल पर बैठकर मनोज तिवारी पूरे देश को प्रदूषण का ज्ञान बांट रहे थे और दिल्ली सरकार पर निशाना साध रहे थे.

सत्ता पक्ष की तरफ से शुरुआत में सिर्फ प्रकाश जावड़ेकर मौजूद थे. बाद में अर्जुनराम मेघवाल और गिरिराज सिंह दिखे. लेकिन इनके अलावा और कोई दूसरा बड़ा मंत्री बहस में मौजूद नहीं था. 3 बजकर 40 मिनट पर बहस शुरू हुई. बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की. इसके बाद बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा की बारी थी. उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री से ही अपील कर दी कि अब प्लास्टिक बैन की तरह प्रदूषण रोकने की कमान भी संभाल लो.

इसके बाद दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा को बोलना था. लेकिन उनके भाषण में प्रदूषण पर चिंता कम और दिल्ली की लोकल राजनीति ज्यादा लग रही थी. प्रवेश वर्मा संसद के इस मंच से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बोल रहे थे. बोलते बोलते गरिमा भी लांघ रहे थे और कह दिया कि दिल्ली का मुख्यमंत्री बहुत बड़ा प्रदूषण है. अंत में प्रवेश वर्मा ने सभी सांसदों से दिल्ली का प्रदूषण कम करने के लिए दो-दो करोड़ रुपये देने की अपील भी कर दी.

तृणमूल कांग्रेस की सांसद डॉक्टर काकोली घोष दास्तीदार की बारी आई तो उन्होंने मास्क के साथ ही बहस की शुरुआत की. टीएमसी की सांसद ने प्रधानमंत्री से स्वच्छ हवा मिशन शुरू करने की अपील की. उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन तो है, लेकिन क्या हम स्वच्छ हवा मिशन भी शुरू कर सकते हैं. हम सांस लेने के लिए लड़ रहे हैं लेकिन क्या भारत में साफ हवा हमारा अधिकार नहीं होना चाहिए. क्या ये हमारा मानवाधिकार नहीं है?

शाम को 6 बजे के बाद गौतम गंभीर भी बोले. अंग्रेजी में उन्होंने भी दिल्ली के प्रदूषण पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, ”जब मैं जमीन पर परिवर्तन की बात करता हूं तो मैं अपने लोकसभा क्षेत्र के प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत की तरफ आपका ध्यान चाहूंगा. गाजीपुर का कूड़ाघर, जो एशिया का सबसे बड़ा कूड़े का पहाड़ है. जो भी दिल्ली में रहता है, उसे वहां जाना चाहिए और सिर्फ 200 मीटर दूर खड़े रहना चाहिए, उन्हें ये जरूर अहसास होगा कि नरक क्या होता है? इसको ठीक करना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.