ZARA HAT KE | इस गांव में दुल्हन को सफेद लिबास में किया जाता है विदा, मां-बाप खुद करते हैं ये काम, दूल्हे के घर भी होते हैं फेरे

नई दिल्ली: दुनियाभर में आज भी कई अजीबोगरीब रीति रिवाज हैं जिनका लोग पालन करते हैं। दुनिया के अलावा भारत में भी कई ऐसी परंपराओं का पालन किया जाता है जिनके बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। भारत में कई समुदाय रहते हैं जिनमें हैरान वाले रीति रिवाजों का पालन किया जाता है। पूजा पाठ से लेकर शादी तक में अजीबोगरीब नियमों का पालन किया जाता है जिसका अलग महत्व होता है।

भारत में शादी का महत्व बहुत बड़ा होता है। आज हम आपको एक समुदाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें एक अजीब रीति रिवाज का पालन किया जाता है। इस सुमदाय में शादी के बाद दुल्हन का लाल जोड़ा निकलवा दिया जाता है। यह काम दुल्हन के माता पिता खुद करते हैं। दुल्हन की विदाई विधवा के लिबास में की जाती है। आइए जानते हैं कि भारत के इस समुदाय में लोग आखिर ऐसा क्यों करते हैं।

हम जिस गांव की बात कर रहे हैं वह मध्य प्रदेश में स्थित है जो मंडला जिले में है। इस गांव का नाम भीमडोंगरी है जहां आदिवासी समाज रहता है। इस आदिवासी समुदाय में शादी काफी धूमधाम से होती है। भारतीय शादियों की तरह ही इस गांव में भी शादी होती है, लेकिन शादी होने के बाद अजीबोगरीब रीति रिवाजों का पालन किया जाता है।

इस अजीबोगरीब रीति रिवाज में दुल्हन को सफेद लिबास में विदा करना शामिल है। इस गांव में शादी के बाद विदाई के समय दुल्हन को विधवा की तरह सफेद कपड़े पहना दिए जाते हैं। यहां दुल्हन ही गांव के सभी लोग

जानिए क्यों पहना जाता है सफेद कपड़ा
अब आपके मन में सवाल खड़ा रहा होगा कि ऐसा क्यों किया जाता है। दरअसल इस रीति रिवाज के पीछे एक खास वजह है। इस गांव के लोग गौंडी धर्म को मानते हैं। यह लोग सफेद रंग को शांति का प्रतीक मानते हैं। इसके अलावा इस रंग को पवित्र मानते हैं जिसमें कुछ मिलावट नहीं होता है। इसलिए शादी में सफेद कपड़ा पहनना शुभ माना जाता है। यहां के लोग आदिवासी रिवाजों से अलग नियम का पालन करते हैं। इस गांव में शराब पर बैन है।

जानिए गांव में क्या है नियम
इस गांव में सेफद कपड़े पहनने के अलावा कई नियमों का पालन किया जाता है। शादी में लोगों के इस पहनावे को देखकर हैरानी होती है। इस समुदाय में दुल्हन के घर अलावा दूल्हे के घर पर भी फेरे होते हैं। चार फेरे दुल्हन के घर और बाकी तीन दूल्हे के घर पर।