नक्सलियों का शहीदी सप्ताह हुआ समाप्त ; इस दौरान कोरोना वैक्सीन लगवाने व साफ-सफाई का करते रहे प्रचार

NAXALITE
सांकेतिक फोटो
  • जवानों की मुस्तैदी और कोरोना ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी
  • इस शहीदी सप्ताह मे नक्सली नही दे सके किसी भी वारदात को अंजाम

राकेश पांडे / जगदलपुर: बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित अंदरूनी इलाकों में 28 जुलाई से शुरू हुए नक्सलियों के शहीदी सप्ताह मंगलवार 03 अगस्त को समाप्त हो गया, इन सात दिनों में नक्सली अपने मृत साथियों को श्रद्धांजलि देकर अपने बचे हुए नक्सलियों का मनोबल बढ़ाने का काम करते हैं, इसके साथ ही एकाध वारदात को अंजाम देकर अपनी बहादूरी का प्रर्दशन कर अपने ताकत का प्रचार-प्रसार करते हैं। लेकिन इस बार नक्सलियों के शहीदी सप्ताह में बड़ा बदलाव देखा गया, इस दौरान नक्सली किसी वारदात को अंजाम देने की रणनीति बनाने की जगह कोरोना के बारे में जानकारी देते रहे, कोरोना को गंभीर बीमारी बताते हुए कोरोना की वैक्सीन लगवाने और साफ-सफाई का प्रचार करते रहे, इससे पुलिस के दावे जिसमें कहा गया था कि नक्सलियों बीच कोरोना के फैलने से कई नक्सलियों की मौत हो गई है, प्रमाणित होती है।

बस्तर में नक्सलियों के शहीदी सप्ताह को देखते हुए पुलिस पहले से ही अलर्ट थी। बस्तर के सातों जिलों में सुराक्षाबल अंदरूनी इलाकों में लगातार सर्चिंग कर रहे थे। जवानों की मुस्तैदी ऐसी रही कि नक्सली किसी भी घटना को अंजाम नहीं दे पाए। अलग-अलग जिलों में मुठभेड़ में कुछ नक्सली मारे गये, कुछ आत्मसमर्पण तथा गिरफ्तार जरूर हुए हैं। आम तौर पर नक्सली शहीदी सप्ताह के दौरान कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं। लेकिन इस बार पिछले एक हफ्ते में माओवादी किसी भी घटना को अंजाम नहीं दे सके हैं।

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इस बार जवानों की मुस्तैदी के साथ नक्सली कोरोना संक्रमण से अपने साथियों के मरने के बाद नक्सली बड़ी सभा करने से बचते देखे गये। कोरोना का डर नक्सलियों में स्पष्ट देखने को मिला जिसके चलते एक भी वारदात इस दौरान नक्सलियों के द्वारा किये जाने का प्रयास भी नही किया गया। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि कोरोना ने नक्सलियों की कमर तोड़कर रख दी है। जवानों की मुस्तैदी का आलम ऐसा था कि जिन नक्सलियों को कोरोना हो गया था, उनके इलाज के लिए वे बाहर तक नहीं निकल सके और उनकी मौत की खबर आती रही, लेकिन नक्सली कोरोना से किसी भी नक्सली की मौत होने की बात को अब तक स्वीकारा नही है।

  • Mats Advt