‘नंबर वन पॉर्न स्टार’ ने बताया- तालिबान राज में थी रेप की ‘छूट’, 30 साल का समय किसी सपने की तरह बीता

काबुल : तालिबान ने 1990 के दशक में जब काबुल पर कब्जा किया तब यासमीना अली सड़क के किनारे खड़ी एक छोटी सी खौफजदा बच्ची थी। यासमीना ने अफगानिस्तान में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के खिलाफ हिंसा देखी जिसके बाद वह पढ़ाई के लिए ब्रिटेन चली गईं। अफगानिस्तान के लिए लगभग 30 साल का समय किसी सपने की तरह बीता और तालिबान एक बार फिर सत्ता में वापस आ गया। लेकिन अब यासमीना मासूम बच्ची के नहीं है बल्कि एक शक्तिशाली महिला और अफगान कार्यकर्ता बन चुकी हैं

यासमीना अफगानिस्तान की ‘नंबर वन पॉर्न स्टार’ के रूप ने जानी जाती हैं। फेमिनिस्ट सेक्स एक्टिविस्ट यासमीना का तो मानना है कि वह देश की इकलौती पॉर्न स्टार हैं। यासमीना ने नास्तिक बनने के लिए अपनी मुस्लिम धर्म की जड़ों को त्याग दिया है। उनका मानना है कि तालिबान पॉर्न वेबसाइट के माध्यम से उनके बारे में सब कुछ जानता है। डेलीस्टार की रिपोर्ट के मुताबिक एक पॉडकास्ट में यासमीना ने कहा कि तालिबानी ज्यादातर मेरे कंटेंट से नफरत करते हैं क्योंकि वे नहीं चाहते कि अफगानिस्तान पॉर्न के लिए जाना जाए।

‘तालिबान को लगता है वे मेरे शरीर के मालिक’
उन्होंने कहा कि मैंने अपना शरीर दिखाने की हिम्मत कैसे की? तालिबानियों को लगता है कि वे मेरे शरीर के मालिक हैं। मैं अपने शरीर के साथ जो करती हूं और इसे दिखाने का मुझे कोई अधिकार नहीं है। अगर मैं ऐसा करती हूं तो मैं एक सच्ची अफगान नहीं हूं। मुझे अक्सर लोगों के मैसेज आते हैं कि मैं यहूदी हूं या अंडरकवर हूं। यासमीना ने कहा, ‘मैं एक अफगान हूं। संभवतः तालिबान ही मेरा कंटेंट देख रहा है। मुझे यकीन है कि उन्होंने मेरे बारे में सुना है। इसमें हैरानी वाली कोई बात नहीं है। सिर्फ अफगान पॉर्न सर्च करने पर मेरा नाम दिख जाता है।’

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तालिबान राज में ‘रेप’ जैसी कोई चीज नहीं
पॉडकास्ट में यासमीना ने बताया कि अफगानिस्तान में उनका जीवन बिल्कुल अलग था। उनकी मां ने एक बार उन्हें बताया था कि तालिबान राज में ‘रेप’ जैसी कोई चीज नहीं होती है। मुझे आज भी वह सब याद है। उस एहसास को मैं कभी नहीं भूल सकती। एक बच्ची के रूप में अपनी आंखों देखी हिंसा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने देखा था कि लोगों को धार्मिक न होने और उचित रूप से धार्मिक पोशाक न पहनने के लिए पीटा जाता था। यासमीना ने कहा कि मैं सिर्फ महिलाओं के खिलाफ हिंसा के बारे में बात नहीं कर रही हूं। इस्लाम के अनुसार दाढ़ी न रखने के लिए युवा मुस्लिमों को भी पीटा जाता था।