Sports | कभी शोहरत का ताज सर पर था, आज जेल में रोते हुए कट रही हैं रातें, सुशील का ऐसा चेहरा जो केवल करीबी ही जानते हैं

नई दिल्ली: सुशील कुमार के वीकिपीडिया पेज पर जाएं तो आपको नजर आता था कि कैसे दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बापरौला गांव से ओलिंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप के पोडियम तक का सफर उन्होंने तय किया। यह कहानी काफी रोमांचक थी। एक प्रेरणादयी कहानी।

हालांकि इसमें एक अपडेट हुआ है। ऐसा अपडेट जिसे कोई भी खेल प्रेमी नहीं देखना चाहेगा। किसी ने इसके बारे में नहीं सोचा होगा। खुद सुशील ने भी नहीं। इस पर लिखा है, श्23 मई 2021 को सुशील को 23 वर्षीय पहलवान सागर धनखड़ की हत्या में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।श् और सुशील जो दुनियाभर के पहलवानों को पटखनी दे रहा था, हवालात में उसकी पहली रात रोते हुए बीती।

सुशील को करीब से जानने वाले यही कहते हैं कि यह पहलवान काफी मिलनसार था। वह एक आज्ञाकारी बेटा था और एक ध्यान रखने वाला भाई। एक प्यार करने वाला पति था और एक बहुत ज्यादा जान लुटाने वाला पिता। एक ईमानदार दोस्त था, जो कई बार अपने दोस्तों की मदद करने के लिए लीक से हटकर भी मदद करता था।

लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होंगे जो सुशील के कथित रूप से अन्य काम धंधों के बारे में जानते होंगे। वे इस राय से इत्तेफाक नहीं रखते। उन्हें इस दिन का डर था। और जो कुछ हुआ उससे उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई।

करीबी कोच ने बताया हाल
एक पूर्व राष्ट्रीय कोच जिसने सुशील के साथ बीजिंग ओलिंपिक के दौरान से ही काफी करीब से काम किया। उन्होंने तीन साल के अंतर के बाद 2017 में सुशील की वापसी में अहम भूमिका निभाई। उनका कहना था, श्आम लोगों और उभरते हुए पहलवानों और अन्य खेलों की ट्रेनिंग करने वालों के लिए छत्रसाल स्टेडियम हमेशा से खेल गतिविधियों के लिए पवित्र स्थान माना जाता रहा है।श्

श्उभरते हुए ऐथलीट स्टेडियम को हमेशा से एक बड़ा स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूशन समझते रहे हैं। हालांकि इसका एक स्याह पहलु भी है। इस छत्रसाल स्टेडियम में बिन बुलाए मेहमान, जिनमें से कोई भी खेल से संबंधित नहीं था। वे लोग अकसर स्टेडियम परिसर में आया करते थे और उससे मैदान के बाहर के बिजनस के बारे में चर्चा किए करते। सुशील के बेहद करीबी ही इस चर्चा का हिस्सा हुए करते।श्

आरोप है कि सुशील का बाहरी दिल्ली, और पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर्स पर टोल प्लाजा कलेक्शन का बिजनस था। इसके अलावा उत्तर और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक बड़े भारतीय एफएमसीजी ब्रांड के आयुर्वेद स्टोर से भी सुशील जुड़ा हुआ था। इसके साथ ही उसके करीबी रियल स्टेट, बैड लोन की रिकवरी और प्रॉपर्टी खाली करवाने के बिजनस में थे। रेसलिंग में बड़ा नाम कमाने में असफल रहने वाले पलवानों को भी कथित रूप से टोल प्लाजा पर जॉब दी जाती। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच अब सुशील और करीबी गैंगस्टर नीरज बवाना और उसके दुश्मन कहे जाने वाले भगौड़ा करार काला जेठड़ी के रिश्तों को खंगाल रही है। यह आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है।

खेल की दुनिया में कमाया नाम
सुशील की जिंदगी 2014 से पहले इतनी पेचीदा नहीं थी। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने अपना दूसरा गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले 2010 दिल्ली में उन्होंने पहला ब्ॅळ गोल्ड जीता था और इसके बाद 2018 में गोल्ड कोस्ट में भी सुशील ने सोने का तमगा हासिल किया था। 1998 में वर्ल्ड कैडेट गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद से सुशील को कुश्ती की दुनिया में बड़ा नाम समझा जाने लगा था। सुशील ने 14 साल की उम्र में छत्रसाल स्टेडियम में कुश्ती के लिए दाखिला लिया। सुशील ने 1982 के एशियाड में गोल्ड मेडलिस्ट महाबली सतपाल से ट्रेनिंग लेनी शुरू की, जिनकी बेटी से बाद में सुशील की शादी भी हुई।

सुशील ने धीरे-धीरे कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ीं। 2003 से 2008 के बीच कॉमनवेल्थ और एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीते। 2006 में जब 66 किलोग्राम भारवर्ग में दोहा एशियन गेम्स में सुशील ब्रॉन्ज मेडल जीता वह भारतीय कुश्ती जगत में बड़ा नाम बन चुके थे।

बीजिंग ओलिंपिक में पदक से बदली जिंदगी
हालांकि 2008 का साल बड़ी तब्दीली लेकर आया। इस साल सुशील ने बीजिंग ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता। 56 साल में पहली बार रेसलिंग में मेडल जीतने वाले वह भारतीय पहलवान बने। इससे पहले केडी जाधव ने 1952 के हेलसिंकी ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। 2010 में मास्को में वर्ल्ड चैंपियनशिप में सुशील ने गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले भारत के किसी पहलवान ने यह उपलब्धि हासिल नहीं की थी।

लंदन में चांदी
दो साल सुशील ने लंदन ओलिंपिक में बीजिंग के प्रदर्शन को सुधारा। यहां उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। सुशील का पेट ठीक नहीं था इसके बावजूद चांदी का तमगा हासिल करना एक बड़ी कामयाबी था। ओलिंपिक में दो निजी पदक हासिल करने वाले सुशील पहले भारतीय बने। भारतीय खेल के पोस्टर बॉय बन चुके थे सुशील। कई पहलवानों ने सुशील से प्रेरणा ली। तोक्यो ओलिंपिक में जाने वाले पहलवानों में से तीन रवि दाहिया, बजरंग पूनिया और दीपक पूनिया- सभी छत्रसाल स्टेडियम से ही निकले हैं।

अंतरराष्ट्रीय करियर में कामयाबियों के चलते सुशील को सरकार ने कई इनाम दिए। कई स्पॉन्सर भी मिले। नॉर्दन रेलवे स्पोर्ट्स असोसिएशन ने 2013 में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर नौकरी दी (हालांकि मंगलवार को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया)। बाद में सुशील को डेप्युटेशन पर दिल्ली सरकार के एजुकेशन डिपार्टमेंट में ऑफिसर ऑन स्पेशनल ड्यूटी पर छत्रसाल में लाया गया।

प्राथमिकताएं बदलीं और रेसलिंग ने ली बैकसीट
यहां से सुशील की प्राथमिकताएं बदलने लगीं। ऐसे बिजनस में उनका नाम आने लगा जिन्हें साफ तो नहीं कहा जा सकता। स्टेडियम अब सुशील का साम्राज्य बन गया था। जहां वह अपने जॉर्जियाई कोच व्लादीमीर मेस्ताविरिशविली के अंडर अपने साथियों के साथ ट्रेनिंग करता। साथ ही साथ अपने बेहद करीबियों के जरिए अपने बिजनस भी बढ़ाए रखता।

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद सुशील ने मुकाबले चुनने शुरू कर दिए। इसी वजह से इनचॉन एशियाड में भाग नहीं लिया। सुशील और नरसिंह यादव के बीच 2016 के रियो ओलिंपिक से पहले हुए विवाद को कौन भूल सकता है। इसके बाद हुए डोप विवाद ने मामले को और तूल दिया। इस विवाद ने देश में कुश्ती के समाज को हमेशा के लिए दो हिस्सों में बांट दिया। यहां तक कि सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त भी एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए थे।

प्रवीण राणा का विवाद
नरसिंह के बाद प्रवीण राणा के साथ सुशील का विवाद हुआ। राणा ने आरोप लगाया कि सुशील ने अपने सपॉर्टर्स से उन्हें और उनके भाई को पिटवाया। यह गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ ओलिंपिक से पहले इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल के दौरान की है। सुशील पर मारपीट की प्राथमिकी भी दर्ज हुई।

सुशील का कुश्ती के साथ मोहभंग का एक नजारा तब नजर आया जब 2018 के जर्काता एशियाई खेलों के पहले ही राउंड में उन्हें हार मिली। एक साल बाद नूर सुल्तान में वर्ल्ड चैंपियनशिप, जो तोक्यो ओलिंपिक का क्वॉलिफायर भी था, में भी पहले राउंड में ही सुशील बाहर हो गए। उसके बाद से वह कुश्ती के अखाड़े में नहीं हैं।

फेडरेशन का कामकाज
2016 से 2020 के दौरान स्कूल गेम्स फेडरेशन के अध्यक्ष के तौर पर सुशील ने काम में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। शहर की एक फुटबॉलर की मौत के मामले को गलत तरीके से हैंडल करने पर फेडरेशन की काफी आलोचना हुई। नीतिशा नेगी की पेसिफिक स्कूल गेम्स के दौरान ऐडिलेड में मौत हो गई थी। इसके बाद फेडरेशन की मान्यता रद्द कर दी गई थी।

ऐसा लगता है कि मौजूदा विवाद सुशील के दो दशक लंबे रेसलिंग करियर पर पूर्ण विराम लगा सकता है। सभी चाहने वालों के लिए सुशील का तौलिये के पीछे छुपा चेहरा देखना दिल-दुखाने वाला है। पहलवान ने लॉक-अप में अपनी पहली रात रोते हुए काटी थी।

यह वक्त ही बताएगा कि खेलप्रेमी सुशील को कैसे याद करेंगे- एक बड़ा खिलाड़ी या एक जेल गया अपराधी।