राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर लगा दिया है ‘कोडवर्ड’, आखिर G-23 के सवालों का जवाब कौन देगा?

नई दिल्ली: एक ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में भारत जोड़ो यात्रा शुरू है, तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के अगले अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर ही बड़ा सस्पेंस है। थ्रिलर फिल्म जैसा। ऐन वक्त पर इसमें एक और सीन जुड़ गया है। और यह जोड़ा है राहुल गांधी ने। उनसे जब शुक्रवार को अध्यक्ष चुनाव के बारे में पूछा गया तो जवाब ‘कोडवर्ड’ में मिला।

उन्होंने कहा कि वह यह फैसला कर चुके हैं कि पार्टी के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर उन्हें क्या करना है। उन्होंने यह नहीं बताया कि उनका फैसला क्या है। राहुल के इस जवाब ने विरोधी खेमे की बेचैनी जरूर बढ़ा दी होगी। पार्टी के अगले अध्यक्ष के लिए संभावित नाम में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम चल रहा है, तो वहीं शशि थरूर जैसे नेता भी हैं जो यह कह रहे हैं कि अधिक से अधिक लोगों को चुनाव लड़ना चाहिए। वहीं चुनाव से पहले शशि थरूर, मनीष तिवारी और दूसरे सासंदों ने केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण (CEA) प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री को पत्र लिखा है।

इस पत्र में कहा गया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के निर्वाचक मंडल (डेलीगेट) की सूची मतदान में हिस्सा लेने वालों और संभावित उम्मीदवारों को नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रदान की जाए। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर इतना कहा जा सकता है कि इस बार पार्टी अध्यक्ष को लेकर एकतरफा फैसला मुश्किल होने वाला है।

G-23, इतनी आसानी से पीछा छोड़ने वाले नहीं
कांग्रेस पार्टी के भीतर G-23 के कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। इस कड़ी में हालिया नाम गुलाम नबी आजाद का है। पहले सिब्बल और फिर गुलाम नबी आजाद के जाने के बाद ऐसा लगा कि पार्टी के भीतर विरोध के सुर नरम पड़ेंगे। हालांकि ऐसा लगता नहीं है। गांधी परिवार और खासकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की कार्यशैली को लेकर G-23 के नेता सवाल उठाते रहे हैं। साथ ही इन नेताओं का जोर सबसे अधिक पार्टी अध्यक्ष के चुनाव को लेकर रहा है। पार्टी अध्यक्ष के लिए चुनाव की तारीख आने के साथ ही यह खबर सामने आई कि गांधी परिवार के करीबी अशोक गहलोत पार्टी के अगले अध्यक्ष हो सकते हैं। हालांकि इस बीच राहुल गांधी से इस जिम्मेदारी को लेने की मांग कई नेताओं की ओर से की जा रही है।

वहीं दूसरी ओर G-23 के नेता हैं यदि उनके बयान पर गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि वह आसानी से इस बार ऊपर से कोई नाम आए तो उस पर वह राजी होने वाले नहीं हैं। कुछ दिन पहले ही शशि थरूर ने ऐसे संकेत दिए कि वो चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन बाद में उन्होंने इससे इनकार किया। शशि थरूर ने कहा कि नए अध्यक्ष का चुनाव करना पुनरुद्धार की ओर एक शुरुआत है जिसकी कांग्रेस को सख्त जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि इस चुनाव के लिए कई उम्मीदवार सामने आएंगे।

कांग्रेस के भीतर ‘लेटर बम’, चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल
पार्टी सांसद शशि थरूर, मनीष तिवारी, कार्ति चिदंबरम, प्रद्युत बारदोलोई और अब्दुल खालिक ने मधुसूदन मिस्त्री को पत्र लिखकर यह कहा है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के निर्वाचक मंडल (डेलीगेट) की सूची मतदान में हिस्सा लेने वालों और संभावित उम्मीदवारों को दिया जाए। यह नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले हो। पत्र लिखने वाले दो सांसद थरूर और तिवारी पार्टी के भीतर जी23 समूह से हैं। पहले इनकी ओर से पूरी लिस्ट को सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया था लेकिन मिस्त्री ने साफ इनकार कर दिया था। पिछले महीने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने 28 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्वाचन सूची तैयार किए जाने की प्रक्रिया के बारे में जानना चाहा था। हालांकि बाद में पार्टी ने कहा था कि इस बैठक में किसी नेता ने कोई सवाल खड़ा नहीं किया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने हाल ही में कहा था कि गांधी परिवार ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव से किनारा कर लिया है और चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद ही वह तय करेंगे कि इस चुनावी मुकाबले में उतरा जाए या नहीं। इसी के साथ उन्होंने उनके पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की संभावना सिर्फ अटकलें बताया। सभी तरह के विकल्पों को खुला रखते हुए उन्होंने कहा कि यह चुनाव पार्टी के लिए अच्छा है। शशि थरूर ने कहा कि यदि कांग्रेस पद के लिए चुनाव होता है तो इससे लोगों का ध्यान उधर जाएगा तथा पार्टी की कार्यशैली, विचाराधारा, मूल्य, देश के प्रति उसके दृष्टिकोण की फिर चर्चा होगी।

कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर G-23 बनाम अन्य
कांग्रेस में अगले अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रही चर्चा के बीच पार्टी के भीतर कई ऐसा नेता हैं जो इस बात की वकालत कर रहे हैं कि गांधी परिवार से ही पार्टी का अगला अध्यक्ष बने। खासकर राहुल गांधी को इसके लिए मनाने की कोशिश चल रही है। इन नेताओं की ओर से यह आशंका भी जताई जा रही है कि ऐसा नहीं होने पर पार्टी में टूट भी हो सकती है।

राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि मेरी व्यक्तिगत इच्छा है कि अध्यक्ष गांधी परिवार से होना चाहिए। यदि गांधी परिवार नेतृत्व नहीं करता तो पार्टी में गुटबाजी उभर सकती है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गांधी परिवार से ही कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की पैरवी कर रहे हैं। अशोक गहलोत ने कहा कि गांधी परिवार फैसला करते वक्त अपना पराया नहीं देखते, फैसला पार्टी हित में करते हैं। राहुल गांधी अध्यक्ष बनें, हम लोग उनके पीछे इसलिए पड़े हैं कि वो पार्टी अध्यक्ष बने तो पार्टी एक जुट रहेगी। राहुल गांधी से इस पद को संभाले जाने की बात कई दूसरे नेता भी कर रहे हैं।

वहीं पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही कांग्रेस का बागी गुट जी-23 भी एक्टिव हो गया है। एक बात तो तय हो गई है कि यदि गांधी परिवार से कोई सामने नहीं आता तो किसी और के लिए चुनाव इतना आसान नहीं होगा। जी-23 के नेता लगातार इसको लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। मनीष तिवारी की इन बातों से समझा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा कि यह 28 प्रदेश कांग्रेस कमिटी और आठ क्षेत्रीय कांग्रेस कमिटी का चुनाव नहीं है।

कोई क्यों पीसीसी के कार्यालय जाकर पता करे कि प्रतिनिधि कौन हैं? सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि ऐसा क्लब के चुनाव में भी नहीं होता। मैं आपसे (मिस्त्री से) आग्रह करता हूं कि निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सूची प्रकाशित की जाए। बात उसी सूची की हो रही है जिसको लेकर फिर से सवाल खड़े हुए हैं।

मनीष तिवारी ने कहा कि यदि कोई चुनाव लड़ना चाहता है और यह नहीं जानता कि प्रतिनिधि कौन हैं, तो वह नामांकन कैसे करेगा, क्योंकि उसे 10 कांग्रेस प्रतिनिधियों की बतौर प्रस्तावक जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि 10 प्रस्तावक नहीं होंगे तो नामांकन खारिज हो जाएगा। पार्टी सांसद शशि शरूर ने भी कहा है कि हर किसी को पता होना चाहिए कि कौन मतदान कर सकता है। महत्वपूर्ण है कि निर्वाचन सूची को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए। गांधी परिवार से कोई नाम आए तो भले ही यह लड़ाई थम जाए लेकिन किसी और के नाम पर घमासान जरूर होगा।