महाराष्ट्रः सुप्रीम कोर्ट से चारों पक्षों को नोटिस, जानें- सुनवाई के दौरान किस वकील ने क्या दलील दी?

मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्यपाल के आदेश की न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती. सिर्फ फ्लोर टेस्ट हो सकता है. आर्टिकल 361 को देखिए. राज्यपाल किसी कोर्ट के प्रति जवाबदेह नहीं हैं.

नई दिल्लीः

महाराष्ट्र में सरकार को लेकर जारी विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चारों पक्षों को नोटिस जारी किया है. इन चारों में से केंद्र और राज्य सरकार के अलावा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार शामिल हैं. इस दौरान सभी पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी राय रखी. शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यपाल के फैसले के खिलाफ जोरदार तर्क दिया.

सुप्रीम कोर्ट का सवाल

मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कल इस मामले की फिर से सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्यपाल के आदेश की कॉपी भी मांगी. विधायकों के समर्थन पत्र की कॉपी देने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस रमन्ना ने राज्यपाल के फैसले को लेकर कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि राज्यपाल किसी को भी बुलाकर शपथ दिलवा दें. जस्टिस रमन्ना के सवालों का जवाब देते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि किसी को सड़क से उठा कर शपथ नहीं दिलवाई गई है.

मुकुल रोहतगी का जवाब

इस दौरान महाराष्ट्र बीजेपी के वकील सुप्रीम कोर्ट से मुकुल रोहतगी ने कहा कि मैं कुछ बीजेपी विधायकों की तरफ से आया हूं. रविवार को सुनवाई पर आपत्ति है. इसकी जरूरत नहीं थी.

मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्यपाल के आदेश की न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती. सिर्फ फ्लोर टेस्ट हो सकता है. आर्टिकल 361 को देखिए. राज्यपाल किसी कोर्ट के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. उनके विवेक से लिए फैसले को नहीं बदला जा सकता.

मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इनकी याचिका देखिए. राज्यपाल का आदेश रद्द करने की मांग कर रहे हैं. संविधान के मुताबिक ऐसा नहीं हो सकता.

तुषार मेहता का तर्क

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि आप किसके लिए पेश हुए हैं? उन्होंने कहा कि मुझे कोई निर्देश अभी तक नहीं मिला है. सॉलिसिटर जनरल होने के नाते याचिकाकर्ताओं की तरफ से रात को याचिका दी गई, इसलिए आया हूं.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट जा सकते थे. मौलिक अधिकार का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकते थे.

सिब्बल की दलील

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी दलील में कहा कि कर्नाटक में आपने तुरंत फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था. हम यही मांग कर रहे हैं. हम विधानसभा में अपनी शक्ति साबित कर देंगे.

सिंघवी का सवाल

अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलील कोर्ट में पेश की. उन्होंने पूछा कि गवर्नर को कौन सी चिट्ठी मिली? क्या वह विधायकों से मिले? जब एक गठबंधन एक शाम पहले बहुमत का सार्वजनिक दावा कर चुका था, तब क्या उन्हें विधायकों से नहीं मिलना चाहिए था.

अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हमने राज्यपाल को बता दिया है कि अजीत पवार विधायक दल के नेता नहीं हैं. मराठी में भेजी गई इस चिट्ठी में 41 विधायकों के दस्तखत हैं. अब जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट करवाया जाना चाहिए.

‘लोकतंत्र के साथ धोखा हुआ’

सिंघवी ने कहा कि गोवा के मामले में, उत्तराखंड के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. फ्लोर टेस्ट का आदेश हुआ. अपनी दलील में सिंघवी ने कहा कि महाराष्ट्र में जो हुआ वह लोकतंत्र के साथ धोखा है. जिन्होंने सरकार बनाई है, वह फ्लोर टेस्ट से दूर क्यों भाग रहे हैं.

कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कर्नाटक का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कर्नाटक में इन्होंने 7 दिन, फिर 3 दिन की मांग की थी. तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बहुमत कल ही साबित करें.