RBI ने सरकार को दिया बड़ा फंड, जानें इस पर क्यों हुआ था मतभेद

नई दिल्ली:

रिजर्व बैंक की ओर से एक लाख 76 हजार करोड़ की जो भारी भरकम धनराशि केंद्र सरकार को दिए जाने का फैसला हुआ है, उसे लेकर पूर्व में सरकार से देश के केंद्रीय बैंक की टकराव की भी खबरें आ चुकी हैं. यह भी दावा किया जाता है कि केंद्र सरकार से इस धनराशि को लेकर हुए टकराव के बाद ही आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल और बाद में डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने इस्तीफा दे दिया था.

RBI के दो अधिकारियों ने दिया इस्तीफा

विपक्षी दल भी केंद्र सरकार पर आरबीआई पर इस फंड को लेकर दबाव डालने का आरोप लगाते हैं. हालांकि दिसंबर 2018 में इस्तीफा देने के बाद अपने बयान में उर्जित पटेल ने कहा था- मैं निजी कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं. आरबीआई में काम करना मेरे लिए गर्व की बात रही. अधिकारियों और प्रबंधन से भरपूर सहयोग मिला.

उधर उर्जित पटेल के इस्तीफा देने के सात महीने बाद जून 2019 में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर पद से विरल आचार्य ने भी इस्तीफा देकर चौंका दिया था. डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कार्यकाल पूरा होने के करीब छह महीने पहले ही अपने पद को छोड़ दिया था.

खास बात रही कि विरल आचार्य आरबीआई के उन बड़े अधिकारियों में शामिल थे जिन्‍हें उर्जित पटेल की टीम का हिस्‍सा माना जाता था. इस इस्तीफे के पीछे भी आरबीआई के पास मौजूद फंड को लेकर सरकार से टकराव की वजहें कहीं गईं. हालांकि आरबीआई या इस्तीफा देने वाले दोनों शीर्ष अधिकारियों ने इसे निजी वजह ही करार दिया था. 

कांग्रेस ने किया हमला

रिजर्व बैंक की ओर से सरकार को भारी सरप्लस राशि देने के निर्णय की कांग्रेस ने आलोचना की है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि अर्थव्यवस्था की यह बदहाली मोदी सरकार की नीतियों की वजह से है. सरकार कुछ बताना नहीं चाहती और न ही इस बारे में कोई श्वेतपत्र लाना चाहती.

शर्मा ने कहा, ‘रघुराम राजन सहित सहित सभी पूर्व गवर्नर ने इसका विरोध किया था. डॉ. सुब्बाराव, डॉ. रेड्डी, डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने इसे विनाशकारी बताया था. दुनिया में जब कोई बहुत बड़ा संकट आता है, तब ऐसा किया जाता है. अर्जेंटीना ने हाल में ऐसा किया था तो वहां की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई. इसी के विरोध में उर्जित पटेल ने इस्तीफा दिया है. इस निर्णय के विनाशकारी प्रभाव होंगे’.