WEATHER ALERT | मौसम विभाग ने प्रदेश के 27 जिलों में से 15 में कोल्ड डे की चेतावनी जारी की

  • जशपुर में 20 साल बाद रिकॉर्ड सर्दी, पंडरापाठ में -2 डिग्री सेल्सियस, 15 जिलों में कोल्ड डे की चेतावनी
  • प्राइमरी व मिडिल स्कूल सुबह 8.30 बजे से

रायपुर : 2019 ने जाते-जाते सर्दी का अहसास करा दिया है। ठंड का आलम ये है कि शनिवार को जशपुर के पंडरापाठ में -2 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया, जो पिछले 20 साल में सबसे कम है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 27 जिलों में से 15 में कोल्ड डे की चेतावनी जारी की है। सभी जिलों के प्रशासनिक अमले को ठंड से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है।

जिन स्कूलों में दो पालियों में कक्षाएं संचालित की जा रही है। वहां पहली पाली में प्राइमरी व मिडिल की कक्षाएं सुबह 8.30 बजे से दोपहर 12.30 तक लगेंगी। जबकि हाई व हायर सेकंडरी की कक्षाएं दोपहर 12.45 से शाम 5 बजे तक लगेंगी। इसी तरह जहां सिर्फ एक पाली के लिए स्कूल है, वहां सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक कक्षाएं लगाई जाएंगी।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, बिलासपुर, कवर्धा, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़, बेमेतरा, जांजगीर, राजनांदगांव, बलौदाबाजार, महासमुंद में दो दिन शीतलहर चल सकती है।

रायपुर में सीजन की सबसे ठंडी रात, पारा 9.6 डिग्री

राजधानी रायपुर में इस साल की पहली कड़ाके की ठंड है। रात का तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। इस सीजन में पहली बार पारा 10 डिग्री से नीचे पहुंचा है। यह सामान्य से तीन डिग्री कम है। खास बात यह है कि 24 घंटे के दौरान रात के तापमान में 6.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ गई। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस था। शनिवार को दिनभर ठंडी हवा चली। अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यह भी सामान्य से चार डिग्री कम है।

छत्तीसगढ़ में ऐसी सर्दी पड़ रही है क्योंकि…

  • लालपुर मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा के अनुसार आसमान में छाए बादल साफ होते ही उत्तर से तेज शुष्क हवाएं चलने लगीं। इसी के असर से प्रदेश में ठंड बढ़ गई है। दरअसल पिछले तीन-चार दिनों से अरब सागर में बना चक्रवात खत्म हो गया है। इससे  अब समुद्र से नमी आनी बंद हो गई है। नमी का प्रभाव खत्म होते ही उत्तरी शुष्क और बर्फीली हवा का प्रभाव बढ़ गया है।
  • पुणे के सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज रिसर्च के वैज्ञानिक डॉ. भूपिंदर सिंह के मुताबिक जलवायु परिवर्तन पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता को प्रभावित कर रहा है। यह इस साल पारे को नीचे ला सकता है।