Success Story | अमूल कंपनी में पिता थे ड्राइवर, बेटा उसकी कंपनी में बना बड़ा अधिकारी, स्कूल के ही दिनों से स्काॅरशिप से की पढ़ाई

अहमदाबाद: कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि ‘कौन कहता है आसमान में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों’। हाल ही में आईआईएम अहमदाबाद से प्लेसमेंट के जरिए कंट्री डिलाइट के एसोसिएट मैनेजर बने हितेश सिंह के लिए ये कहावत सटीक साबित होती है। उनके पिता अमूल कंपनी में एक ड्राइवर की नौकरी करते हैं, लेकिन परिवार की फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स कभी 24 साल के हितेश की राह का रोड़ा नहीं बनीं।हितेश का एक सपना सच हो गया!

हितेश ने पहले तो कड़ी मेहनत से आईआईएम अहमदाबाद का सफर तय किया, जिसके लोग सपने देखते हैं और फिर डेयरी उद्योग की कंट्री डिलाइट कंपनी में एक ऊंचा पद हासिल किया। हितेश सिंह हमेशा से ही चाहते थे कि उनकी नौकरी डेयरी सेक्टर में ही लगे, ऐसे में कंट्री डिलाइट में एसोसिएट मैनेजर बनना उनका सपना सच होने जैसा है। हितेश हमेशा ही अपने रोल मॉडल आर एस सोडी को फॉलो करना चाहते थे, जो गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, जो अमूल ब्रांड की ही मार्केटिंग करता है।स्कूल के दिनों से ही मिलती रही स्कॉलरशिप, कभी नहीं लिया ट्यूशन

हितेश सिंह ने एक गुजराती मीडियम स्कूल से अपनी पढ़ाई की थी और 12वीं में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और गणित यानी पीसीएम स्ट्रीम में 97 पर्सेंटाइल हासिल किया। वह स्कूल के दिनों से ही स्कॉलरशिप पर पढ़ाई करते रहे और उन्होंने कभी ट्यूशन भी नहीं ली। उनकी मां सरिताबेन उन्हें घर में पढ़ाती थीं। हितेश ने एसएमसी कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस, आनंद एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी से बीटेक में डेयरी टेक्नोलॉजी में टॉप किया था। कॉमन एडमिशन टेस्ट यानी कैट में उन्हें 96.12 पर्सेंटाइल हासिल हुआ था।कभी सिर्फ 600 रुपये महीना कमाते थे हितेश के पिता

हितेश के पिता पंकज सिंह अपने पूरे परिवार के साथ बिहार से आनंद आकर बस गए थे। उन्होंने शुरुआती दिनों में एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की, जहां से वह सिर्फ 600 रुपये प्रति माह कमाते थे। उसके बाद उन्होंने ड्राइविंग सीखी और 2007 में GCMMF में नौकरी शुरू कर दी। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से हितेश सिंह ने पढ़ाई और निजी खर्च के लिए लोन भी लिया। आईआईएम अहमदाबाद से उन्होंने फूड एंड एग्री-बिजनस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम किया, जिसके लिए उन्हें इंस्टीट्यूट की तरफ से एक स्पेशल स्कॉलरशिप भी मिली।डेयरी में हितेश को दिखते हैं शानदार मौके

हितेश सिंह के पिता GCMMF में ही एक ड्राइवर की नौकरी करते हैं और उन्हीं के जरिए कई साल पहले हितेश की मुलाकात पहली बार आर एस सोडी से हुई थी। उसके बाद से ही सोडी उनके आदर्श बन गए। अपने करियर में आगे बढ़ने के दौरान उन्होंने कई बार आर एस सोडी से मार्गदर्शन लिया। हितेश कहते हैं कि वैल्यू के आधार पर दूध उत्पादन कृषि में सबसे अहम योगदान रखता है। इसके बावजूद मौजूदा समय में सिर्फ 25 फीसदी हिस्सा ही ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के पास है, यानी इस क्षेत्र में अभी बहुत मौके हैं। आने वाले 4-5 सालों में और भी बड़े आर्गेनाइज्ड प्लेयर इस क्षेत्र में आएंगे\8i]ke